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बृहत्संहिता • अध्याय 17 • श्लोक 12
युद्धं समागमे वा यद्यव्यक्ती स्वलक्षणैर्भवतः । भुवि भूभृतामपि तथा फलमव्यक्तं विनिर्देश्यम् ॥
युद्ध (भौम आदि ग्रहों का परस्पर युद्ध) और समागम (चन्द्र के साथ सम्मेलन ) यदि अपने-अपने उक्त लक्षणों से अव्यक्त (अप्रकाशित) हो (जैसे युद्ध में कौन ग्रह "विनयों और कौन ग्रह पराजित है- इसका ज्ञान न होता हो) तथा समागम में ग्रह से चैन्द्रमा न उत्तर न दक्षिण; किन्तु मध्य में होकर गमन करते हो, तो पृथ्यों पर राजाओं को भी अव्यक्त (सन्दिग्धात्मक) फल कहना चाहिये ।
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