पूर्वोक्त लक्षण से विपरीत लक्षणयुत (उत्तर दिशा में स्थित, स्निग्ध, कम्पन से रहित, दूसरे ग्रह को प्राप्त करने वाला, ऊपर में स्थित और तेजस्वी) हो तथा दक्षिण में स्थित होने पर भी यदि विपुल, निर्मल, कान्तियुत विम्ब वाला ग्रह हो तो विजयी होता है।
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