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बृहत्संहिता • अध्याय 17 • श्लोक 1
अघ ग्रहयुद्धाध्यायो व्याख्यायते। तत्रादावेवोपोद्घातमाह- युद्धं यथा यदा वा भविष्यमादिश्यते त्रिकालज्ञैः । तद्विज्ञानं करणे मया कृतं सूर्यसिद्धान्ते ॥
जिस समय जिस प्रकार से ताराग्रहों का युद्ध त्रिकालज्ञों ने कहा है, उसको सूर्यसिद्धान्त से लेकर मैंने करण (पञ्चसिद्धान्तिका) में कहा है।
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