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बृहत्संहिता • अध्याय 16 • श्लोक 5
भेषजभिषक्चतुष्पदकृषिकरनृपहिंस्त्रयायिचौराणाम् । व्यालारण्ययशोयुततीक्ष्णानां भास्करः स्वामी ॥
संग्राम में जीतने को इच्छा रखने वाले, चोर, सर्प, निर्जन स्थान, यशस्वी, तीक्ष्ण ( निम्ब आदि या जन-इन सबों के स्वामी सूर्य है।
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