उदयसमये यः स्निग्धांशुर्महान् प्रकृतिस्थितो यदि च न हतो निर्घातोल्कारजोग्रहमर्दनैः । स्वभवनगतः स्वोच्चप्राप्तः शुभग्रहवीक्षितः स भवति शिवस्तेषां येषां प्रभुः परिकीर्तितः ॥
उदय समय में निर्मल, विपुल, स्वभावस्थित, निर्घात, उल्का, धूलि तथा ग्रहयुद्ध से अहत, अपनी राशि स्थित, उच्चगत या शुभग्रह (चन्द्र, बुध, गुरु और शुक्र) से दृष्ट ग्रह जिनका स्वामी हो, उनके लिये शुभ करने वाला होता है।
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