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बृहत्संहिता • अध्याय 16 • श्लोक 38
परदारविवादरताः पररन्ध्रकुतूहला मदोत्सिक्ताः । मूर्खाधार्मिकविजिगीषवश्च केतोः समाख्याताः ॥
परस्त्रीगामी, विवादी, दूसरे का दोष सुनने के लिये उत्कण्ठित, मत्त (पागल), मूर्ख, अधार्मिक, जीतने की इच्छा रखने बाला-इन सबों का स्वामी केतु है।
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