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बृहत्संहिता • अध्याय 16 • श्लोक 35
कुलपांसनहिंस्त्रकृतघ्नचौरनिः सत्यशौचदानाश्च खरचरनियुद्धवित्तीव्ररोषगर्ताश्रया नीचाः ॥
कुल में कलङ्क लगाने वाले, क्रूर, कृतघ्न (उपकार को नहीं मानने वाले), चोर, मिथ्या व्यवहार करने वाले, शौचरहित, कृपण, गदहा, गुप्तचर, बाहुयुद्ध को जानने वाले, अति क्रोधी, गर्त में रहने वाले, नीच
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