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बृहत्संहिता • अध्याय 16 • श्लोक 33
कटुतिक्तरसायनविधवयोषितो भुजगतस्करमहिष्यः । खरकर भचणकवातलनिष्पावाश्चार्कपुत्रस्य ॥
कटु द्रव्य (मरोच आदि), तिक्त (निम्ब आदि), रसायन, विधवा स्त्री, सर्प, चोर, महिषी (भैंस), गदहा, ऊँट, चना, वातल (मटर-राजमाष आदि), धान्य-इन सबों का स्वामी शनि है।
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