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बृहत्संहिता • अध्याय 16 • श्लोक 32
बान्धनशाकुनिकाशुचिकैवर्तविरूपवृद्धसौकरिकाः । गणपूज्यस्खलितव्रतशवरपुलिन्दार्थपरिहीनाः ॥
बन्धन-स्थानस्थित, पक्षियों को मारने वाले, अशुचि में रत (अपवित्र), घीवर, कुरूप, वृद्ध, सूअर पालने वाले (डोम), सद्धियों में प्रधान, नियम को नहीं पालन करने वाले, शबर, पुलिन्द (म्लेच्छ जाति),
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