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बृहत्संहिता • अध्याय 16 • श्लोक 26
ये च पिवन्ति वितस्तामिरावतीं चन्द्रभागसरितं च । रथरजताकरकुञ्जरतुरगमहामात्रधनयुक्ताः ॥
वितस्ता, ऐरावती और चन्द्रभागा नदी के जल पीने वाले, रथ, चान्दी, आकर (अर्थोत्पत्ति स्थान), हाथी, घोड़ा, महामात्र (हस्ती के अधिप), घनी, सुगन्ध द्रव्य, पुष्य, चन्दन, मणि (पद्मराग आदि),
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