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बृहत्संहिता • अध्याय 16 • श्लोक 18
चरपुरुषकुहकजीवकशिशुकविशठसूचकाभिचाररताः । दूतनपुंसकहास्यज्ञ भूततन्त्रेन्द्रजालज्ञाः ॥
जीवनयात्रा चलाने वाले), बालक, कवि, शठ (परोपकार से विमुख), चुगलखोर, अभिचार (वशीकरण, उच्चाटन, विद्वेषण, मारण आदि को जानने वाले), दूत, नपुंसक, हँसी उड़ाने वाले, भूत-प्रेत के तन्त्र को जानने वाले, इन्द्रजाल को जानने वाले
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