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बृहत्संहिता • अध्याय 14 • श्लोक 25
कैकयवसातियामुनभोगप्रस्थार्जुनायनाग्नीध्राः । आदर्शान्तः द्वीपित्रिगर्ततुरग आननाः श्वमुखाः ॥
कैकय, वसाति, यमुना, भोगप्रस्थ, अर्जुनयान, अग्निधर, आदर्श, अंतर्द्वीपीय, त्रिगर्थ, तुरग, स्वमुख
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