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बृहत्संहिता • अध्याय 14 • श्लोक 20
अपरस्यां मणिमान् मेघवान् वनौघः क्षुरार्पणोऽस्तगिरिः । अपरान्तकशान्तिकहैहयप्रशस्ताद्रिवोक्काणाः ॥
पश्चिम में मणिमठ और मेघावत पहाड़ियाँ, वनौघ, क्षुरर्पण पर्वत, अष्टगिरि, अपरान्तक, शान्तिक, हैहय, प्रशस्त पर्वत, वोक्कन
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