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बृहत्संहिता • अध्याय 11 • श्लोक 9
उक्तविपरीतरूपो न शुभकरो धूमकेतुरुत्पन्नः । इन्द्रायुधानुकारी विशेषतो द्वित्रिचूलो वा
यदि इसका स्वरूप ऊपर बताए गए से बिल्कुल विपरीत है, तो यह धूमकेतु है और शुभ साबित नहीं होगा, खासकर जब यह इंद्रधनुष जैसा दिखता हो या इसमें दो या तीन शिखाएं हों।
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