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बृहत्संहिता • अध्याय 11 • श्लोक 8
ह्रस्वः तनुः प्रसन्नः स्निग्धः त्वृजुः अचिरसंस्थितः शुक्लः । उदितोऽथवाभिवृष्टः सुभिक्षसौख्यावहः केतुः ॥
यदि केतु छोटा, पतला, स्पष्ट, चमकदार, सीधा, थोड़े समय के लिए दिखाई देने वाला, सफेद हो और यदि उसकी उपस्थिति के ठीक बाद वर्षा हो, तो यह प्रचुरता और खुशी लाता है।
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