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बृहत्संहिता • अध्याय 11 • श्लोक 48
यावत एव मुहूर्तान् दर्शनमायाति निर्दिशेत्मासान् । तावदतुलं सुभिक्षं रूक्षे प्राणान्तिकान् रोगान् ॥
जितने मुहूर्त वह दिखेंगे, उतने महीनों तक भोजन की अभूतपूर्व प्रचुरता रहेगी। तथापि यदि उसका शरीर कोमल न होकर कठोर हो, तो ऐसी बीमारियों का प्रकोप होगा जो मानव जाति के लिए घातक सिद्ध होंगी।
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