कुमुद इति कुमुदकान्तिः वारुण्यां प्राक्षिखो निशामेकाम् ।
दृष्टः सुभिक्षमतुलं दश किल वर्षाणि स करोति ॥
कुमुद नामक धूमकेतु जिसकी शिखा पूर्व में फैली हुई है और सफेद चमक के साथ पश्चिम में केवल एक रात के लिए देखा जा सकता है। उनके दर्शन होते ही संसार में लोगों को लगातार दस वर्षों तक अद्वितीय शांति और प्रचुरता प्राप्त होगी।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।