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बृहत्संहिता • अध्याय 11 • श्लोक 33
अपरस्यां चलकेतुः शिखया याम्याग्रयांगुलौच्छ्रितया । गच्छेद् यथा यथोदक् तथा तथा दैर्घ्यमायाति ॥
पश्चिम दिशा में एक चलकेतु या एक गतिशील धूमकेतु उदय होता है। उनकी शिखा एक इंच ऊँची है और दक्षिण की ओर मुड़ी हुई है। वह ज्यों-ज्यों उत्तर की ओर जाता है उसकी लम्बाई बढ़ती जाती है।
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