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बृहत्संहिता • अध्याय 11 • श्लोक 29
उदगायतो महान् स्निग्धमूर्तिः अपरोदयी वसाकेतुः । सद्यः करोति मरकं सुभिक्षमपि उत्तमं कुरुते ॥
उनमें से एक का नाम वासकेतु है, जिसका शरीर उत्तर की ओर फैला हुआ, पुष्ट, चमकदार रूप वाला और पश्चिम की ओर उभरा हुआ है। जिस दिन वह प्रकट हो जायेगा और प्रत्यक्ष हो जायेगा, उसी दिन घातक बीमारियाँ फूट पड़ेंगी; परन्तु भोजन बहुतायत से होगा।
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