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बृहत्संहिता • अध्याय 11 • श्लोक 23
विंशत्यधिकमन्यत्शतमग्नेः विश्वरूपसंज्ञानाम् । तीव्रानलभयदानां ज्वालामालाकुलतनूनाम् ॥
अग्नि से उत्पन्न 120 केतुओं का एक और समूह है जिसका नाम विश्वरूप है और जो ज्वालाओं की पंक्तियों से संपन्न है। इनसे मानव जाति को आग के गंभीर प्रकोप का खतरा है।
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