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बृहत्संहिता • अध्याय 11 • श्लोक 2
दर्शनमस्तमयो वा न गणितविधिनास्य शक्यते ज्ञातुम् । दिव्यान्तरिक्षभौमाः त्रिविधाः स्युः केतवो यस्मात् ॥
गणना द्वारा केतु के उदय या अस्त का पता लगाना संभव नहीं है, क्योंकि केतु तीन प्रकार के होते हैं - आकाशीय, वायुमंडलीय और स्थलीय।
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