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बृहत्संहिता • अध्याय 108 • श्लोक 4
धारणवर्षणरोहिणिवायव्याषाढ भद्रपदयोगाः क्षणवृष्टिः कुसुमलताः सन्ध्याचिह्न दिशां दाहः ॥
गर्भधारण, प्रवर्षण, रोहिणीयोग, स्वातियोग, आषाढ़ीयोन, यातचक्र, सद्योवर्पण, कुसुमलता, सन्ध्यालक्षण, दिग्वहतक्षण ।
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