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बृहत्संहिता • अध्याय 108 • श्लोक 2
चार श्चागस्त्यमुनेः सप्तर्षीणां च कूर्मयोगश्च । नक्षत्राणां व्यूहो ग्रहभक्तिर्महविमर्दश्च ॥
अगस्त्यचार, सप्तर्षिचार, कूर्मविभाग, नक्षत्रव्यूह, ग्रहभक्तियोग, ग्रहयुद्ध ।।२।। सप्तर्षीणां चारो महभक्तिर्महविमदों अहयुद्धम्। गताथैयमार्या ।
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