अन्तरचक्र, विरुत, श्वचक्र, शिवारुत, मृगचेष्टा, अश्वचेष्टा, वायसविद्या। यहाँ पर शिवारुताध्याय के अन्तर्गत श्वचेष्टित और गोचेष्टिताध्याय के अन्तर्गत उष्ट्री, व्याघ्नी, सिंहाँ आदि प्रधान सभी जीवों का लक्षण कहा गया है तथा मृग जातियों के मध्य में मार्जार, व्याघ्र, सूकर, ऊँट आदि जीवों का शृगाल की तरह लक्षण कहा गया है।
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