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बृहत्संहिता • अध्याय 107 • श्लोक 1
ज्योतिः शास्त्रसमुद्रं प्रमथ्य मतिमन्दराद्रिणाऽध मया। लोकस्यालोककरः शास्त्रशशाङ्कः समुत्क्षिप्तः ॥
मैंने (वराहमिहिर ने) बुद्धिरूप मन्दराचल के द्वारा ज्यौतिष शास्त्ररूप समुद्र का अच्छी प्रकार से मन्धन करके संसार को प्रकाशित करने वाले शाखरूप चन्द्र को बाहर निकाला है।
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