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बृहत्संहिता • अध्याय 106 • श्लोक 3
मासनामसमुपोषितो नरो द्वादशीषु विधिवत् प्रकीर्तयन्। केशवं समभिपूज्य तत्पदं याति यत्र नहि जन्मजं भयम् ॥
मनुष्य विधिपूर्वक द्वादशी में मास के नाम के साथ व्रत रखकर केशव, नारायण आदि की पूजा करने के पश्चात् उनके नाम का कीर्तन करता हुआ उनके पद को प्राप्त होता है, जहाँ पर पुनर्जन्म का भय नहीं होता।
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