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बृहत्संहिता • अध्याय 105 • श्लोक 9
प्रलम्बबाहुः पृथुपीनवक्षाः क्षपाकरास्यः सितचारुदन्तः । गजेन्द्रगामी कमलायताक्षः स्त्रीपित्तहारी स्मरतुल्यमूर्तिः ॥
पूर्वकथित पूजा करने से मनुष्य लम्बी भुजाओं से युत, विस्तीर्ण और पुष्ट छाती वाला, चन्द्र के समान मुख वाला, सफेद-सुन्दर दाँतों से युत, गजेन्द्र के समान गति वाला, कमल के समान विस्तीर्ण नेत्र वाला, स्त्रो के चित्त को हरण करने चाला और कामदेन के समान स्वरूप वाला होता है।
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