व्रत समाप्त होने के बाद अपनी शक्ति के अनुसार कालज्ञ ब्राह्मण के लिये सुवर्ण, रत्न और वस्त्रों के साथ घृत से पूर्ण पात्र दान करना चाहिये।
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