चैत्र शुक्ल अष्टमी में यदि मूल नक्षत्र और चन्द्रवार हो तो उस दिन विष्णु और नक्षत्र की पूजा करके प्रथम उपवास प्रारम्भ करके जैसे-जैसे रोहिणी आदि आता जाय वैसे-वैसे आर्दा तक उपवास करना चाहिये।
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