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बृहत्संहिता • अध्याय 105 • श्लोक 5
चित्रा ललाटसंस्था शिरो भरण्यः शिरोरुहाश्चार्द्रा । नक्षत्रपुरुषकोऽयं कर्तव्यो रूपमिच्छन्द्भिः ॥
चित्रा, शिर में भरणी तथा केशों में आर्द्रा को स्थापित करना चाहिये। सुन्दर रूप की इच्छा करने वाले पुरुषों को यह नक्षत्रचक्र बनाना चाहिये।
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