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बृहत्संहिता • अध्याय 105 • श्लोक 4
ग्रीवा ज्येष्ठा श्रवणं श्रवणौ पुष्यो मुखं द्विजाः स्वातिः । हसितं शतभिषगथ नासिका मघा मृगशिरो नेत्रे ॥
दाँतों में स्वाति, हास्य में शतभिषा, नासिका में मघा, दोनों आँखों में मृगशिरा, ललाट में
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