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बृहत्संहिता • अध्याय 105 • श्लोक 2
कटिरपि च कृत्तिका पार्श्वयोश्च यमला भवन्ति भद्रपदाः । कुक्षिस्था रेवत्यो विज्ञेयमुरोऽनुराधा च ॥
गुह्य ( लिङ्ग और गुदा) में पूर्वफाल्गुनी और उत्तरफाल्गुनी, कमर में कृत्तिका, दोनों पार्श्व में पूर्वभाद्रपदा और उत्तरभाद्रपदा
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