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बृहत्संहिता • अध्याय 105 • श्लोक 11
पुंस्कोकिलसमवाणी ताम्रोष्ठी पद्मपत्रकरचरणा । स्तनभारानतमध्या प्रदक्षिणावर्तया नाभ्या ॥
पुंस्कोकिल के समान वाणी, ताम्र वर्ण के समान ओंठ, कमल के समान हाश और पाँव, स्तनों के भार से नत मध्य भाग, दक्षिणावर्त नाभियों से युत
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