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बृहत्संहिता • अध्याय 105 • श्लोक 10
शरदमलपूर्णचन्द्रद्युतिसदृशमुखी सरोजदलनेत्रा । रुचिरदशना सुकर्णा भ्रमरोदरसन्निभैः केशैः ॥
यदि पूर्वोक्त व्रत को स्त्री करे तो शारदीय चन्द्र के समान मुखकान्ति, कमलदल के समान नेत्र, सुन्दर दाँत, सुन्दर कान, भ्रमरोदर के समान केश
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