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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 8
शशी द्वितीये मानार्थान् ग्लपयति सविघ्नश्च भवति । तृतीये वस्त्रस्त्रीधनविजयसौख्यानि लभते चतुर्थेऽविश्वासः शिखरिणि भुजङ्गेन सदृशः ॥
यदि चन्द्रमा जन्मराशि में हो तो अन्न, उत्तम शय्या और वस्त्र को देता है। द्वितीय में हो तो पूजा और धन का नाश तथा विप्न करता है। तृतीय में हो तो वस्त्र, धन, विजय और सुख का लाभ कराता है तथा जिसके चतुर्थ राशि में चन्द्र हो, उसको शिखरी (पर्वत) पर सर्प की तरह सब पर अविश्वास रहता है। यह शिखरिणी छन्द है।
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