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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 63
लोहदासवृद्धनीचकर्मपक्षिचोरपाशिकान् च्युतविनयविशीर्णभाण्डहस्त्यपेक्षविघ्नकारणानि चान्यथा न साधयेत् समुद्रगोऽप्यपां कणम् ॥
शनिवार में भैंस, छाग, ऊँट, कृष्णलोह (शत्र, आयुध आदि), मृत्य, वृद्ध, नोच, पक्षी, चोर, बन्धन आदि जानने वाले, नम्रता से रहित, फूटा भाण्ड, हस्त्यपेक्षा ( हाथी के ग्रहणादि), विघ्न के कारण इनके आश्रित सभी कार्य सिद्ध होते हैं। इन पूर्वोक्त नियमों को छोड़कर समुद्र में जाने पर भी जलबिन्दु की भी प्राप्ति नहीं होती है। यह समुद्रदण्डक छन्द है।
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