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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 61
हरितमणिमहीसुगन्धीनि वस्त्राणि साधारणं नाटकं शास्त्रविज्ञानकाव्यानि सर्वाः कलायुक्तयो मन्त्रधातुक्रियावादनैपुण्यपुण्यव्रतायोगदूत स्तथाऽऽ युष्यमायानृतस्नानहस्वाणि दीर्घाणि मध्यानि च च्छन्दतश्चण्डवृष्टिप्रयातानुकारीणि कार्याणि सिद्ध्यन्ति सौम्यस्य लग्नेऽह्नि वा ॥
बुध के लग्न या दिन में हरित मणि, पृथ्वी, सुगन्ध द्रव्य, साधारण कार्य, नाटक, शाख, विज्ञान, काव्य, सभी कलायें, द्रव्यों का संयोग, मन्त्रक्रिया, धातुक्रिया, किसी के साथ विवाद, निपुणता, पुण्य, व्रतग्रहण, दूत, आयु के लिये हित कार्य, माया, मिथ्या, स्नान ( पुण्यस्नान आदि), शीघ्र होने वाला कार्य, देर में होने वाला कार्य, मध्य समय में होने वाला कार्य, परचित्त-ग्रहणपूर्वक प्रचण्ड वृद्धि में पदन्यास के अनुकरण करने वाला कार्य अर्थात् कोई हस्व, कोई दीर्घ और कोई मध्यम कार्य-इन सब वस्तुओं से सम्बन्धित कर्म की सिद्धि होती है।
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