सौस्थित्यमवेक्ष्य यो प्रहेभ्यः काले क्रमणं करोति राजा। अणुनापि स पौरुषेण वृत्तस्यौपच्छन्दसिकस्य याति पारम् ॥
सुस्थित प्रहों को देखकर जो राजा शत्रु के ऊपर आक्रमण करता है, वह अल्प
सैन्य से युत होने पर भी औपछन्दसिक वृत (बेदोक्त क्रिया) का पार जाता है। यह
औपच्छन्दसिक छन्द है।
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