पीडाः स्युः पञ्चमस्थे सवितरि बहुशो रोगारिजनिताः घष्ठेऽकों हन्ति रोगान् क्षपयति च रिपून् शोकांच नुदति । अध्वानं सप्तमस्थो जठरगदद्भयं दैन्यं च कुरुते रुक्त्रासौ चाष्टमस्थे भवति सुवदना न स्वापि वनिता ॥
यदि सूर्य जन्मराशि से पञ्चम राशि में हो तो रोग और शत्रु-जनित बहुत प्रकार की पौड़ा; षष्ठ में हो तो रोग, शत्रु और शोक का नाश, सप्तम में हो तो मार्ग में भ्रमण, पेट के रोग का भय और दुःखी तथा अष्टम में हो तो रोग और भय करता है एवं अपनी खी
भी सुवदना (अच्छी तरह बात नहीं करती है। यह सुवदना छन्द है।
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