मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 58
पुरुषस्य सुस्मितत्वनाह प्रकृत्यापि लघुर्यध वृतबाहो व्यवस्थितः । स याति गुरुतर्ता लोके यदा स्युः सुस्थिता ग्रहाः ॥
जिला वाव में लघु असर भोवा (पादान्त) में व्यवस्थित होने से गुर हो जाता है, उसी ताह जो पुरुष स्वभाव से तमु (दूषित फुल में उत्पत्र) और (न्द्रिय) में है अर्थात है, वह भी अनुकूल में होता है। यह हुए न्द है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें