मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 53
नीचेऽरिभेऽस्ते चारिदृष्टस्य सर्व वृथा यत्परिकीर्तितम् । पुरतोऽन्यस्येव कामिन्याः सविलासकटाक्षनिरीक्षणम् ॥
जिस तरह अन्धे के आगे कामयुक्ता त्री का विलास और कटाक्ष के साथ देखना व्यर्थ होता है, उसी तरह नीच राशिगत, शत्रु राशिगत, अस्त और शत्रु ग्रह से दृष्ट ग्रह के जो भी शुभ फल कहे गये हैं, वह सभी निष्फल होते हैं अर्थात् अशुभ फल की वृद्धि होती है। यह विलास छन्द है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें