अशुभनिरीक्षितः शुभफलो बलिना बलवा- शुभदृग्विषयोपगतः ।
नशुभफलप्रदश्च अशुभशुभावपि स्वफलयोव्रजतः समता- मिदमपि गीतकं च खलु नर्कुटकं च यथा ॥
जैसे संस्कृत में नकुंटक और प्राकृत में गीतक- ये दोनों छन्द समान प्रस्तार वाले होते हैं, उसी तरह बली शुभ फल देने वाला ग्रह बली अशुभ फल देने वाले ग्रह से और बली अशुभ फल देने वाला ग्रह बली शुभ फल देने वाले ग्रह से दृष्ट हो तो अपने-अपने शुभ और अशुभ फलों की समता करते हैं, अर्थात् न शुभ न अशुभ; अपितु मध्यम फल देते हैं। यह नर्कुटक छन्द है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।