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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 49
रविभौमी पूर्वार्धे शशिसौरी कथयतोऽन्त्यगौ राशेः । सदसल्लक्षणमार्यागीत्युपगीत्योर्यथासङ्ख्यम् ॥
सूर्य, मंगल राशि के पूर्वार्ध में एवं चन्द्र और शनि राशि के अन्त में शुभाशुभ फल देते हैं। जिस छन्द में आर्या के पूर्वार्ध सम दोनों अर्थ हो, उसको गीति और जिसका उत्तरार्ध सम दोनों अर्थ हो, उसको उपगीति छन्द कहते हैं। यह गीति और उपगीति का लक्षण है।
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