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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 45
कर्मप्राप्तिर्दशमेऽ र्थक्षयश्च विद्याकीत्यर्योः परिहानिश्च सौरे। तैक्ष्ण्यं लाभे परयोषार्थलाभश्चान्त्ये प्राप्नोत्यपि शोकोर्मिमालाम् ॥
दशम राशिगत शनि हो तो कैर्म का लाभ तथा धन, विद्या और कीर्ति का नाश होता है। एकादश राशि में शनि हो तो कठोर स्वभाव तथा दूसरे की त्री और धन का लाभ होता है। द्वादश राशि में शनि हो तो शोक को ऊर्मि (तरंगों) को माला ( समुदाय) की प्राप्ति होती है। यह ऊर्मिमाला छन्द है।
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