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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 43
सुतधनपरिहीणः पश्चमस्थे प्रचुरकलहयुक्त शार्कपुत्रे । विनिहतरिपुरोगः षष्ठयाते पिबति च वनितास्यं श्रीपुटोष्ठम् ॥
जिसके पक्षम राशिगत शनि हो वह पुत्र तथा धनों से रहित और कलहों से युत होता है। पाठ राशिगत शनि हो तो शत्रुरहित, नीरोग और सुन्दर ओठों से युत स्त्री के मुख का पान करने वाला होता है। यह पुटा छन्द है।
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