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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 4
सूर्यः ष‌ट्त्रिदशस्थितस्त्रिदशषट्सप्ताद्यग चन्द्रमा जीवः सप्तनवद्विपश्चमगतो वकार्कजौ ष‌ट्त्रिगौ । सौम्यः ष‌द्विचतुर्दशाष्टमगतः सूर्वेऽप्युपान्ते शुभाः शुक्रः सप्तमषड्दशर्क्षसहितः शार्दूलवत् त्रासकृत् ॥
जन्मराशि से छठी, तीसरी या दसवीं राशि में सूर्य, तीसरी, दशवीं, छठी, सातवीं या पहली राशि में चन्द्रमाः सातवों, नथीं, दूसरी या पाँचवीं राशि में गुरु: छठी या तीसरी राशि में मंगल और शनि: छठी, दूसरी, चौधी, दशवीं या आठयों राशि में बुध तथा ग्यारहयों राशि में सभी ग्रह शुभ होते हैं। सातयों, छठी और दशवीं राशि स्थित शुक सिंह की तरह भय करने वाला होता है। यह शार्दूलविक्रीडित छन्द भी है।
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