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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 38
उपान्त्यगो भृगोः सुतः सुहद्धनान्त्रगन्धदः । धनाम्बरागमोऽन्त्यगः स्थिरस्तु नाम्बरागमः ॥
एका राशिगत शुक्र मित्र, धन, अत्र और सुगन्ध द्रव्य देने वाला होता है। द्वादश राशिगत शुक्र धन और पत्रों का लाभ कराने वाला होता है; किन्तु वख का लाभ स्थिर नहीं रखता। यह स्थिर छन्द है।
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