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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 37
नवमे तु धर्मवनितासुखभाग् भृगुजेऽर्थवस्त्रनिचयश्च भवेत् । दशमेऽवमानकलहान् नियमात् प्रमिताक्षराण्यपि वदन् लभते ॥
जिसके नमव राशि में शुक्र स्थित हो वह धर्म, स्त्री और सुख भोगने वाला तथा पन और वलों से युत होता है। जिसके दशम राशिगत शुक्र हो, वह मनुष्य परिमित भाषण करने पर भी अपमान और कलह का लाभ करता है। यह प्रमिताक्षरा छन्द है।
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