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बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 36
षष्ठो भृगुः परिभवरोगतापदः स्त्रीहेतुकं जनयति सप्तमोऽ शुभम् । यातोऽष्टमं भवनपरिच्छदप्रदो लक्ष्मीवतीमुपनयति त्रियं च सः ॥
षष्ठ राशिगत शुक्र अनादर, रोग और सन्नीग करता है। सप्तम राशिगत शुक्र रखी के सम्बन्ध को लेकर अनिष्ट करता है। अहम राशिगत शुक्र गृह और रख देने वाला तपा लक्ष्मीवती खी का लाभ कराने वाला होता है। यह तक्ष्मी छन्द है।
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