तृतीय राशिगत शुक्र प्रभुत्व, पत्र, मान, स्थान, समृद्धि, वख और शत्रु का नात
करता है। अतुर्थ राशिगत शुक्रमि के साथ समागम तथा वि, इन्द्र और को करता है। यह वन्द है।
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