मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 104 • श्लोक 34
आज्ञार्यमानास्पद भूतिवस्त्रशत्रुक्षयान् दैत्यगुरुस्तृतीये । दत्ते चतुर्थश्च सुहत्समाजं रुद्रेन्द्रवज्ञप्रतिमाच शक्तिम् ॥
तृतीय राशिगत शुक्र प्रभुत्व, पत्र, मान, स्थान, समृद्धि, वख और शत्रु का नात करता है। अतुर्थ राशिगत शुक्रमि के साथ समागम तथा वि, इन्द्र और को करता है। यह वन्द है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें